अलमोड़ा/ दीवान कनवाल उर्फ ‘दीवान दा’ अपने गीतों की मिठास और सादगी से लोगों के दिलों में रहते थे। उनके निधन से अल्मोड़ा सहित समूचे उत्तराखंड में शोक की लहर है। उनके निधन का समाचार सुनने के बाद हर कोई इस महान लोकगायक को श्रद्धांजलि दे रहा है।
जिला मुख्यालय स्थित खत्याड़ी गांव के निवासी दीवान कनवाल पिछले कुछ वक्त से अस्वस्थ्य चल रहे थे। हल्द्वानी के एक हॉस्पिटल में उनका उपचार चल रहा था। ऑपरेशन के बाद कुछ दिन पहले ही वे अपने घर लौटे थे। बुधवार सुबह उन्होंने अपने आवास में अंतिम सांस ली।
दीवान कनवाल अपने पीछे अपनी वयोवृद्ध माता दो विवाहित पुत्रों, दो पुत्रियों को रोता बिलखता छोड़ गए हैं। उनकी पत्नी का पूर्व में निधन हो गया था। स्थानीयजनों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक स्व. कनवाल की अंतिम यात्रा बुधवार दोपहर या अपराह्न में स्थानीय बेतालेश्वर घाट के लिए प्रस्थान करेगी दीवान कनवाल के ‘दाज्यु हमार जवाई रिषे ग्ये.. आज कुछे मैत जा. कस भिड़े कुनई पंडित ज्यू कस करछा ब्या.. ह्यू भरी डाना.
सहित कई आंचलिक कुमांऊनी बोली-भाषा के गाने बहुत प्रसिद्ध हुए। साथ ही लोगों द्वारा खूब गाए-बजाए गए। लगभग 35 वर्षों से अधिक वक्त तक अपनी गायकी से उन्होंने लोगों का दिल जीता। सभी सांस्कृतिक आयोजनों में वें बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे। उनके निधन पर लोक कलाकारों, राजनीतिक-सामाजिक कार्यकर्ताओं समेत कई लोगों ने शोक जताया है।