चम्पावत/ उत्तराखंड की सियासत में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले अब हलचल जबरदस्त तरीके से तेज होती जा रही है। शुक्रवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री धामी लोहाघाट के एक दिवसीय दौरे पर पहुंचे । होली मिलन समारोह में शामिल होने के साथ उन्होंने विशाल जनसभा को भी संबोधित किया परन्तु इस सभा में एक ऐसी गैरमौजूदगी दिखाई दी जिसने पूरे क्षेत्र की राजनीति में हलचल मचा दी ।
जनसभा में नहीं दिखाई दिए पूर्व विधायक पूरन सिंह फर्त्याल
लोहाघाट विधानसभा से दो बार विधायक रह चुके भाजपा के कद्दावर नेता पूरन सिंह फर्त्याल मुख्यमंत्री की सभा में कहीं नजर नहीं आए।
जैसे ही यह बात सामने आई नगर से लेकर गांव तक चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया। सवाल उठने लगे क्या यह नाराजगी का संकेत है या फिर अंदरखाने कुछ और ही सियासी खिचड़ी पक रही है राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि फर्त्याल की अनुपस्थिति साधारण घटना नहीं है। वे क्षेत्र में मजबूत जनाधार वाले नेता माने जाते हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री की महत्वपूर्ण सभा से दूरी बनाना कई मायनों में संदेश देता है। क्या भाजपा में गुटबाजी खुलकर सामने आ रही है लोहाघाट में भाजपा दो खेमों में बंटी नजर आ रही है। एक खेमा वर्तमान नेतृत्व के साथ खड़ा दिखाई देता है तो दूसरा खेमा खुद को उपेक्षित महसूस कर रहा है। अगर यह खींचतान समय रहते नहीं सुलझी तो 2027 विधानसभा चुनाव में भाजपा को बड़ा झटका लग सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2022 की तरह अगर अंदरूनी गुटबाजी बढ़ी तो इसका सीधा फायदा कांग्रेस उठा सकती है। खासकर सीमांत क्षेत्र लोहाघाट में जहां जातीय और स्थानीय समीकरण बेहद संवेदनशील माने जाते हैं।
क्या अभी से होने लगी है 2027 की तैयारी
2027 विधानसभा चुनाव भले ही अभी दूर हों परन्तु टिकट की दावेदारी और क्षेत्रीय पकड़ मजबूत करने की कवायद अभी से शुरू हो चुकी है। मुख्यमंत्री की सभा से पूर्व विधायक की दूरी को कई लोग टिकट की राजनीति से जोड़कर भी देख रहे हैं। सूत्रों की मानें तो भाजपा की ओर से लोहाघाट विधानसभा से टिकट की दावेदारी करने वालों में कई चेहरे शामिल हैं। क्या यह भविष्य की रणनीति है या फिर नेतृत्व को संदेश देने की कोशिश फिलहाल आधिकारिक तौर पर कोई बयान सामने नहीं आया है।
परन्तु सियासत में खामोशी अक्सर बड़े तूफान का संकेत मानी जाती है।
कांग्रेस की बढ़ती उम्मीदें
अगर भाजपा में अंदरूनी कलह यूं ही जारी रही तो कांग्रेस 2027 में इस सीट पर कब्जा जमाने की पूरी कोशिश करेगी स्थानीय स्तर पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं में भी उत्साह देखा जा रहा है। भाजपा की गुटबाजी विपक्ष के लिए संजीवनी साबित हो सकती है। लोहाघाट की राजनीति में यह उठापटक आने वाले वक्त में बड़ा मोड़ ले सकती है। क्या भाजपा समय रहते डैमेज कंट्रोल कर लेगी या 2027 में यह सियासी गैरहाजिरी बड़ा मुद्दा बन जाएगी फिलहाल पूरे जिले में इसी चर्चा के साथ माहौल गर्म है।