चौखुटिया में तेंदुए और भालू के आतंक से ग्रामीण भयभीत, आंकड़े देख आप भी हो जाएंगे हैरान, वन क्षेत्राधिकारी द्वाराहाट चंथरिया की नकारा कार्यशैली से भी ग्रामीण आक्रोशित।
चौखुटिया में तेंदुए और भालू के आतंक से ग्रामीण भयभीत, आंकड़े देख आप भी हो जाएंगे हैरान, वन क्षेत्राधिकारी द्वाराहाट चंथरिया की नकारा कार्यशैली से भी ग्रामीण आक्रोशित।
चौखुटिया/ डर के साए में जीने को मजबूर चौखुटिया तहसील के कई के ग्रामीण चौखुटिया तहसील के ग्रामीण क्षेत्रों में लोग हर दिन डर, दहशत और असुरक्षा के माहौल में गुजा रहे है। तहसील के चमोली जिले से लगे गांव सिमलखेत, टटलगांव और मोहणा तक तेंदुए और भालू का बढ़ता आतंक अब केवल वन्यजीव समस्या नहीं बल्कि एक गंभीर मानवीय संकट बन गया है।
एक महीने में वन्य जीवों के हमलों की लंबी लिस्ट
जनवरी से अभी तक के आंकड़े चौखुटिया क्षेत्र में स्थिति की गंभीरता को स्पष्ट बयां करते है। माह जनवरी- सुनगढ़ी खत्री गांव में तेंदुए ने गौशाला का दरवाजा तोड़कर गाय को मारा।
21 जनवरी को– टटलगांव में दिनदहाड़े बच्चों के साथ चहल-कदमी करता दिखाई दिया तेंदुआ।
30 जनवरी को– खड़कतया और थनीगांव में तीन मवेशियों को तेंदुए ने मौत के घाट उतार दिया बच्चों का स्कूल जाना हुआ मुश्किल।
2 फरवरी को– बौनीगाड़ में स्कूल के पीछे मिला तेंदुआ।
9 फरवरी को– मोहणा गांव में गौशाला तोड़कर दो गायों को बनाया निवाला।
10 फरवरी को– घुड़साली में बछड़े पर किया हमला ग्रामीणों ने फिर पिंजरा लगाने की मांग उठाई।
पिंजरे में पकड़ने के बाद तेंदुओं को कहां छोड़ता है वन विभाग?
ग्रामीणों में सबसे बड़ा आक्रोश वन क्षेत्राधिकारी द्वाराहाट की कार्यप्रणाली को लेकर है ग्रामीणों का कहना है वन क्षेत्राधिकारी को जब सुचना देने के लिए ग्रामीण फौन करते हैं तो वे फौरन नहीं उठाते हैं जिस नंबर से उन्हें फौन करते हैं उसे वन क्षेत्राधिकारी ब्लॉक कर देते हैं। इसके अलावा लोगों का कहना है कि तेंदुओं को पकड़ने के बाद उन्हें कहां छोड़ा जा रहा है इसकी कोई पारदर्शिता भी नहीं है।
यही वजह है कि यह चर्चा आम हो गई है कि तेंदुओं को एक जगह से पकड़कर वन विभाग पास के ही किसी दूसरे इलाके में छोड़ देता है।
अब ग्रामीणों की मांग है कि तेंदुओं को पकड़ने से लेकर छोडने तक की पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग सार्वजनिक की जाए ताकि भ्रम की स्थिति समाप्त हो और विभाग पर लोगों का विश्वास बहाल हो।
ऐसे में कैसे होगा रिवर्स पलायन
सरकार जहां रिवर्स पलायन की बात कर रही है वहीं जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट नजर आ रही है।
यदि हालात ऐसे ही रहे तो वह दिन दूर नहीं जब जान बचाने के लिए लोग मजबूरन शहरों की ओर पलायन करेंगे।मवेशियों की लगातार हो रही हत्याएं ग्रामीण ग्रामीण आजीविका की कमर तोड रही है।
जरूरत है ठोस नीति बनाने की
चौखुटिया क्षेत्र के हालात साफ संकेत दे रहे हैं कि यह समस्या अब टालने योग्य नहीं रही। शासन-प्रशासन और वन विभाग को बस्तियों की ओर बढ़ते जंगली जानवरों के हमलों को रोकने के लिए तत्काल और ठोस नीति बनानी होगी।
केवल पिंजरे लगाना काफी नहीं बल्कि स्थायी समाधान और पारदर्शी कार्रवाई समय की मांग है। वरना डर के साये में जी रहा पहाड़ और भी तेजी से खाली होता चला जाएगा।