पहाड़ों पर मक्के के लिए संकट बनता फॉल आर्मी वार्म, समय से इसे नहीं रोका गया तो फसलों को चट कर जाएगा यह कीट : आदप वैज्ञानिक।

न्यूज़ 13 प्रतिनिधि चम्पावत, पुष्कर सिंह बोहरा:-

चंपावत/ वैश्विक स्तर पर फॉल आर्मी वार्म खाद्य सुरक्षा के लिए एक कड़ी चुनौती बनता जा रहा है। यह एक बहुत ही विनाशकारी कीट है। भारत में, इस कीट को पहली बार 2018 में कर्नाटक में देखा गया था तब से यह लगभग सभी राज्यों में फैल गया है। मक्के के साथ-साथ यह अन्य फसलों जैसे धान, सोयाबीन, गन्ना, कपास, मोटे अनाजों एवं सब्जियों को भी नुकसान पहुंचाता है। पिछले दो-तीन सालों से, यह कीट उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में भी काफी नुकसान पहुंचा रहा है और मक्के की फसल उगाने वाले काश्तकारों के लिए सिरदर्द भी बना हुआ है।

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फॉल आर्मी वार्म की सूंडीयाॅ मुख्य रूप से मक्के की पत्तियों, कोमल गोप तथा तनों को खाते हैं। इस कीट का प्रकोप गंभीर होने पर, पौधों का ऊपरी भाग नष्ट हो जाता है और फसल पूरी तरह चौपट हो जाती है। इस कीट का जीवनकाल लगभग 10 से 15 दिन का होता है और एक वयस्क मादा अपने पूरे जीवन काल में एक से दो हजार तक अंडे दे सकती है। अंडों से निकलने के बाद, भूक्कड़ सूंडीयाॅ पत्तियों को खाकर छलनी कर देती हैं। इन सूंडीयो के सिर पर उल्टे वाई का निशान होता है। कृषि विज्ञान केंद्र, लोहाघाट के वैज्ञानिक डॉ. भूपेंद्र सिंह खड़ायत और कृषि विभाग के एडीओ विजय शर्मा द्वारा ग्राम पड़ासो सेरा, ब्लाक बाराकोट मैं किए गए सर्वे के दौरान मक्के की फसल में इस कीट की क्षति देखी गई है। डाॅ. खड़ायत तथा एडीओ शर्मा द्वारा इस ग्रामसभा के काश्तकारों को कीट की पहचान एवं रोकथाम हेतू मक्के के खेत पर ही प्रशिक्षण भी दिया गया।

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फॉल आर्मी वार्म की रोकथाम कैसे करें?

डॉ. खड़ायत ने बताया कि इस कीट से फसलों को बचाने के लिए खेतों की गहरी जुताई करनी चाहिए और पूरे क्षेत्र में एक साथ ही मक्के की बुवाई खेत मे मेड़ बनाकर करनी चाहिए। मक्के के खेत के चारों ओर ट्रैप फसल जैसे नेपियर घास की तीन से चार पंक्तियां लगानी चाहिए और खेत में कीटभक्षी पक्षियों के बैठने लिए “टी-आकार” की लकड़ी एक एकड़ में लगभग 10 लगानी चाहिए। चार फेरोमोन ट्रैप एक एकड़ में लगाने चाहिए। काश्तकार नीम ऑयल 5 मिली प्रति लीटर का भी छिड़काव कर सकते हैं। इस कीट का प्रकोप ज्यादा होने पर कीटनाशकों जैसे क्लोरैन्ट्रानीलीप्रोल 18.5 प्रतिशत एससी या स्पाईनेटोरम 11.7 प्रतिशत एससी 4 मिली प्रति 10 लीटर में घोल बनाकर छिड़काव कर सकते हैं।

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